होली आई रे.... !!!
होली आई रे कन्हाई रंग बरसे, सुना दे जरा बांसुरी ...
होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं,
गिले शिकवे भूल के दोस्तों, दुश्मन भी गले मिल जाते हैं...
और यही सब भाव और मिजाज़ लिए ढेरों गीत, शानदार माहौल और रंगीन फिज़ा, थोड़ी सी slice जिन्दादिली की, कुछ करीबी लोग, ढेर सारी मस्ती, बेहिसाब मिठाई [या शायद थोड़ी control में.. :-) ] बस और क्या चाहिए जिन्दगी को खूबसूरत बनाने के लिए?
रंगों का ये त्यौहार मुझे बचपन से ही एक अलग अहसास से भरता रहा है, इसमें मुझे मस्ती और डर दोनों एक साथ महसूस होते रहे हैं. पेट में तितलियाँ उड़ती मालूम होती हैं. मन का एक हिस्सा बाहर जा कर इतनी शैतानी करने कहता है की जो सारे साल में ना कर पाया था, दूसरे हिस्से में कुछ अनिश्चित सा होने का डर, थोड़ी जुगुप्सा (रंगों से इतर और चीजों से होली खेलने वालों की वजह से) पता नहीं क्या क्या... सब मिल कर एक मिश्रित अव्यक्त सा अहसास बन जाते हैं.
मेरे हिस्से में भी आप सभी की तरह होली के बहुत सारे खट्टे मीठे अनुभव आये हैं, घर में खेली बचपन की होली से लेकर college hostel में खेली होली तक; दोस्तों के साथ समुन्दर के किनारे लहरों से अठखेलियाँ करते होली के रंगों को धोने की कोशिश से लेकर नितांत अकेले में बैठे TV देखते हुए त्यौहार को जाते हुए देखने तक होली के कई रंगों ने मुझे सराबोर किया है.
बस कभी साले सालियों के साथ मस्ती वाली होली के मजे नहीं ले पाया ;-) खैर वो किस्मत की बात हो गयी... वरना क्या बात है तुम कोई सितमगर तो नहीं , तेरे सीने, में भी दिल है कोई पत्थर तो नहीं... लो जी मैं फिर गीतों में बह चला. नहीं नहीं अभी नहीं.. अभी तो...
रंग है, उमंग है...
मन मस्त, दिल दबंग है...
ठंडाई सर चढ़ रही
या भंग की तरंग है??
कितनी बार हो गया, कुछ लिखता हूँ, मिटा देता हूँ, फिर लिखता हूँ, फिर मिटा देता हूँ .... वस्तुतः अभी तारतम्य नहीं बन पा रहा है.... बस आप सभी को होली के रंगों के साथ ढेर सारी शुभकामनाएं और नमस्कार .. अच्छे से त्यौहार मनाइये, और अपने आप को और अपने आस पास वालो को खुशियाँ बांटिये ...
अगली बार मिलने तक........ bye bye!