Sunday, March 20, 2011

होली है..!

होली आई रे.... !!!
होली आई रे कन्हाई रंग बरसे, सुना दे जरा बांसुरी ...
होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं, 
गिले शिकवे भूल के दोस्तों, दुश्मन भी गले मिल जाते हैं...

और यही सब भाव और  मिजाज़ लिए ढेरों गीत, शानदार माहौल और रंगीन फिज़ा, थोड़ी सी slice जिन्दादिली की, कुछ करीबी लोग, ढेर सारी मस्ती, बेहिसाब मिठाई [या शायद थोड़ी control में.. :-) ] बस और क्या चाहिए जिन्दगी को खूबसूरत बनाने के लिए? 
रंगों का ये त्यौहार मुझे बचपन से ही एक अलग अहसास से भरता रहा है, इसमें मुझे मस्ती और डर दोनों एक साथ महसूस होते रहे हैं. पेट में तितलियाँ उड़ती मालूम होती हैं. मन का एक हिस्सा बाहर जा कर इतनी शैतानी करने कहता है की जो सारे साल में ना कर पाया था, दूसरे हिस्से में कुछ अनिश्चित सा होने का डर, थोड़ी जुगुप्सा (रंगों से इतर और चीजों से होली खेलने वालों की वजह से) पता नहीं क्या क्या... सब मिल कर एक मिश्रित अव्यक्त सा अहसास बन जाते हैं.
मेरे हिस्से में भी आप सभी की तरह होली के बहुत सारे खट्टे मीठे अनुभव आये हैं, घर में खेली बचपन की होली से लेकर college  hostel  में खेली होली तक; दोस्तों के साथ समुन्दर के किनारे लहरों से अठखेलियाँ करते होली के रंगों को धोने की कोशिश से लेकर नितांत अकेले में बैठे TV देखते हुए त्यौहार को जाते हुए देखने तक होली के कई रंगों ने मुझे सराबोर किया है. 
बस कभी साले सालियों के साथ मस्ती वाली होली के मजे नहीं ले पाया ;-) खैर वो किस्मत की बात हो गयी... वरना क्या बात है तुम कोई सितमगर तो नहीं , तेरे सीने, में भी दिल है कोई पत्थर तो नहीं... लो जी मैं फिर गीतों में बह चला. नहीं नहीं अभी नहीं.. अभी तो...
रंग है, उमंग है... 
मन मस्त, दिल दबंग है... 
ठंडाई सर चढ़ रही
या भंग की तरंग है??

कितनी बार हो गया, कुछ लिखता हूँ, मिटा देता हूँ, फिर लिखता हूँ, फिर मिटा देता हूँ .... वस्तुतः अभी तारतम्य नहीं बन पा रहा है.... बस आप सभी को होली के रंगों के साथ ढेर सारी शुभकामनाएं और नमस्कार .. अच्छे से त्यौहार मनाइये, और अपने आप को और अपने आस पास वालो को खुशियाँ बांटिये ... 
अगली बार मिलने तक........ bye bye!   

Saturday, March 05, 2011

ज़िन्दगी का अक्स, गीतों में दिखता है

कहते हैं कि ज़िन्दगी का अक्स, गीतों में दिखता है.
और मेरी ज़िन्दगी का अक्स??  - वो मेरे ब्लॉग में झलकता है ! के एक बानगी पहले भी दे चुका हूँ, एक और देखिये...

उसका सवाल ....  (गीत है 'प्रेम रोग' चलचित्र से... I mean, movie )
तुझसे मिलने की आस है आ जा
मेरी दुनिया उदास है आ जा
रात-दिन तेरी याद आती है
रात-दिन इंतज़ार करती हूँ
मेरी किस्मत में तू नहीं शायद,
क्यूँ तेरा इंतज़ार करती हूँ ..

कल मेरा इंतज़ार था तुझको 
आज मैं इंतज़ार करती हूँ   

 मेरा जवाब - (ये गीत है 'आप की कसम' से ..... गोया के अब movie के नाम भी situation पे फिट बैठ रहे हैं)
जिंदगी के सफ़र में गुज़र जाते हैं 
जो मकाम .. 
वो... फिर नहीं आते 
वो, फिर नहीं आते 
........
बाद में प्यार के चाहे भेजो हज़ारों सलाम
वो फिर नहीं आते, वो फिर नहीं आते 
सुबह आती है, शाम जाती है
सुबह आती है, शाम जाती है यूँही
वक़्त चलता ही रहता है रुकता नहीं
एक पल में ये आगे निकल जाता है
आदमी ठीक से देख पाता नहीं
और परदे पे मंज़र बदल जाता है
एक बार चले जाते हैं जो दिन-रात सुबह-ओ-शाम
वो फिर नहीं आते, वो फिर नहीं आते

और हाँ... एक बात और... sad songs लिखने का मतलब यदि ये निकाला जाए कि मैं दुखी हूँ, तो  -  
दुनिया!!!! पागल है..... या फिर मैं.... दीवाना ..!!         (ये भी गीत ही है... चलचित्र था - शागिर्द! )
:-)

तीसरी और अंतिम, एक कव्वाली... अज़ीज़ मियां की है, बहुत लम्बी है, पर हो सकता है शायद कभी आपने यूँ ही सुनी होगी... चंद लाईनें  ... गौर फरमाइए... मुझे बहुत inspirational और यथार्थवादी लगती हैं  -- 
 आज जवानी पर इतरानेवाले कल पछतायेगा 
चढ़ता सूरज धीरे धीरे ढलता है ढल जायेगा 
..जैसी करनी वैसी भरनी आज किया कल पायेगा
सर उठाकर चलनेवाले एक दिन ठोकर खायेगा
चढ़ता सूरज धीरे धीरे ढलता है ढल जायेगा
मौत सबको आनी है कौन इससे छूटा है
तू फ़ना नही होगा ये खयाल झूठा है
साँस टूटते ही सब रिश्ते टूट जायेंगे
बाप माँ बहन बीवी बच्चे छूट जायेंगे
तेरे जितने हैं भाई, वक़्त का चलन देंगे
छीनकर तेरी दौलत दो ही गज़ कफ़न देंगे
जिनको अपना कहता है सब ये तेरे साथी हैं
कब्र है तेरी मंज़िल और ये बराती हैं
ला के कब्र में तुझको मुरदा बक डालेंगे
अपने हाथोंसे तेरे मुँह पे खाक डालेंगे
तेरी सारी उल्फ़त को खाक में मिला देंगे
तेरे चाहनेवाले कल तुझे भुला देंगे
इस लिये ये कहता हूँ खूब सोचले दिल में
क्यूँ फंसाये बैठा है जान अपनी मुश्किल में
कर गुनाहों पे तौबा
आके बस सम्भल जायें - २
दम का क्या भरोसा है
जाने कब निकल जाये - २
मुट्ठी बाँध के आनेवाले ...
मुट्ठी बाँध के आनेवाले हाथ पसारे जायेगा
धन दौलत जागीर से तूने क्या पाया क्या पायेगा
चढ़ता सूरज धीरे धीरे ढलता है ढल जायेगा