Friday, March 06, 2020

गाता रहे मेरा दिल

पुराने गाने सुनते हुए उनके शब्दों पर ध्यान जाता है मेरा
वो कुछ इतना अंदर उतर जाते हैं कि मैं पिघलने लगता हूँ, रो भी लेता हूँ, हल्का होने तक खालीपन महसूस करता हूँ,  साथ ही बोझिल भी...  हर गुजरते पल को छू कर देखता हूँ, और, और ज्यादा विश्वास होता चलता है कई ऐसी बातों पर (read - theories; to certain extent, even philosophies), जिनको पहले कभी समझना ही असंभव था मेरे लिए. 
बानगी ये रही -
इस मोड़ से जाते हैं कुछ सुस्त कदम रस्ते, कुछ तेज कदम राहें
पत्थर की हवेली को, शीशे के घरोंदो में, तिनकों के नशेमन तक.. इस मोड़ से जाते हैं
एक दूर से आती है, पास आके पलटती है, एक राह अकेली सी रूकती है ना चलती है

जिंदगी के सफ़र में गुजर जाते हैं जो मकाम, वो फिर नहीं आते
वक़्त चलता ही रहता है, रुकता नहीं
एक पल में ये आगे निकल जाता है,
आदमी ठीक से देख पाता नहीं और परदे पे मंजर बदल जाता है

एक और अधूरा सा हिस्सा, पूरा मत कीजिये, बस समझिये ... नहीं, असल में वो भी जरुरी नहीं है...
आप वहां पहुँच पाते हैं तो स्वागत है, नहीं भी पहुँच पाए तो भी कोई शिकायत नहीं, सब अपनी जगह, अपने तरीकों से देखते, मानते, सीखते और जानते हैं, इसीलिए तो सब unique होते हैं, मैं, वो, आप, सभी...
कहानियों के किरदार, अपने आप में एक कहानी