कुछ दिनों पहले... नहीं.. दिनों नहीं शायद महीनों पहले एक छोटी सी बहस में मैंने शिरकत की थी. विषय था - क्या समय और दूरी में कोई फर्क है या दोनों एक ही हैं? तुरंत निष्कर्ष पर पहुँचाना वाकई जल्दबाजी होगी, थोड़ा विचार जरुरी है|
सूर्य हमसे इतना दूर है कि प्रकाश को 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ़्तार से आने पर भी 8 मिनट से थोड़ा ज्यादा वक़्त लगता है. मतलब हम हमेशा सूर्य को 8 मिनट से थोड़ा ज्यादा पुराना ही देख पाते हैं. यदि हम सूर्य से इतना दूर होते कि ये अंतर कुछ घंटों का होता तो हम समय में उतना ही पीछे जाकर पुराने सूरज को देखते होते|
इसी सिद्धांत पर हम ब्रम्हांड में पुरानी खगोलीय घटनाओं को देखते हैं और दूर स्थित तारों में ब्रम्हांड की शुरुआत को देखने और ढूँढने की कोशिश करते हैं| अब यदि हम किसी तरह प्रकाश से थोड़ा ज्यादा तेज जा पायें तो हर बार हम शायद वक़्त में भी पीछे जा रहे होंगे| विचार बहुत ही उत्तेजना भरने वाला है. शायद हम अपने ही होने को अलग तरीके से देख पाएंगे|
मान लें कि हम (मानव) प्रकाश से 10 या फिर 100 गुना ज्यादा गति से चलने के तरीके जान जाते हैं तो शायद हम अपने ही बचपन कि घटनाओं को फिर से अपने ही सामने होता देख पाएंगे..! मजेदार लगता है!!
यानी हमारा सफ़र दूरी के साथ समय के भी पीछे होगा .... time travel का शानदार तरीका होगा ये!
फिर भी मुझे विचार अधूरा लगता है... आपका क्या ख्याल है?
कमलेश... thanks for putting this up while traveling to and fro Al-Mas.... I will wait for your comments.. as it was your idea only and I might have flunked in putting it in the way you might trying to, other day.
फिर भी मुझे विचार अधूरा लगता है... आपका क्या ख्याल है?
कमलेश... thanks for putting this up while traveling to and fro Al-Mas.... I will wait for your comments.. as it was your idea only and I might have flunked in putting it in the way you might trying to, other day.
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Hi..!
Thanks a lot for taking out your valuable time for commenting on my post. Your inputs will help me in more than one way.
Regards,
Sandy