बहुत दिन हुए कुछ लिखे हुए... इधर जिंदगी तीखे किनारों पर भी तेज़ रफ़्तार भागते हुए मुझे सांस लेने की फुरसत भी नहीं दे रही. अब लिखना, ब्लॉग पर ही सही, पर टाइम पास से जरा दूर और आदत के थोड़ा और नज़दीक हो गया है. अब लिखने में ज्यादा मज़ा आने लगा है पर फिर वही बात जो बड़े बच्चन जी अपनी मधुशाला में कह गए है..
दर दर घूम रहा था जब मैं चिल्लाता - हाला! हाला!
मुझे न मिलता था मदिरालय, मुझे न मिलता था प्याला,
मिलन हुआ, पर नहीं मिलनसुख लिखा हुआ था किस्मत में,
मैं अब जमकर बैठ गया हूँ, घूम रही है मधुशाला।
मुझे न मिलता था मदिरालय, मुझे न मिलता था प्याला,
मिलन हुआ, पर नहीं मिलनसुख लिखा हुआ था किस्मत में,
मैं अब जमकर बैठ गया हूँ, घूम रही है मधुशाला।
मेरी हालत भी कुछ ऐसी ही है, लिखने में मजा आने लगा तो लिखने के लिए वक़्त निकालना मुश्किल होने लगा. (वैसे शायद मेरा आलस भी जिम्मेदार है.... या शायद थोड़ा ज्यादा ही... :-) )
मेरे दिमाग में इतनी सारी बातें एक साथ आती रहती हैं कि जरा चूकूँ कि विषयांतर होते देर ही नहीं लगाती..
तो साहेबान, नयी बात ये है कि बहुत दिनों बाद मुझे कोर्ट में मज़ा आया... अब मज़ा आने की कोई बहुत बड़ी वजह तो नहीं है बस Judge साहब ने एक बात कह दी कि वो तलाक के 2 साल पुराने मामले को जल्दी से खत्म करना चाहते हैं और ढिलाई देने के मूड में नहीं हैं. बस फिर क्या था... साले साहब ने अफरा तफरी मचाते हुए दनादन नए आवेदन दे दिए... और उनमें गलतियाँ भी कर दीं .. Judge साहब बहुत नाराज़ हुए और खूब सुनाई. फिर हमारे जोरू-के-भाई, I mean मेरे साले साहब ने आव देखा ना ताव और फटाफट फाइल में सुधार कार्य में जुट गए.... जब फाइल Judge साहब के पास पहुंची तो वो फिर गुस्सा हो गए और 15 - 20 वकीलों के सामने, तरीके से, साले साहब को झाड़ दिया कि अभी तक मैंने correction के आदेश नहीं दिए और तुमने बगैर इजाज़त सब अपने मन से कर भी लिया??
अब आप चाहें तो मुझे sadist भी कह सकते हैं .... पर भैया... मज़ा तो आ ही गया..! :-)
अब आगे क्या? बस इतना ही थोड़े ही... अब मैडम (अरे समझ भी जाइए कि हम अपनी ४ साल पुरानी wife के बारे में ही बात कर रहे हैं) को शायद कुछ और सूझा और वो चट से पुराना राग अलापने लगीं कि उनको पैसे वैसे नहीं चाहिए और वो मेरे साथ रहना चाहतीं हैं.... नहीं सर जी ... कोर्ट में नहीं (वहाँ तो वो आई ही नहीं थीं), मेरे ऊपर मेरे well-wishers से दबाव बनवाना चाहती हैं. अब आमने सामने तो सिवाय गालियों और धमकियों के, कुछ बोलती नहीं हैं, पर तलाक के मुकदमे को लम्बा खींचने की मुहिम कमजोर होते दिखते इधर उधर से approach चालू है. पहले मैडम अपनी चहेती मौसीजी के द्वारा मुझे सन्देश भिजवाने की कोशिश कर चुकी हैं पर वो (मौसीजी) भी मुझसे नज़र मिला कर सीधी बात करने से कतरा रहीं हैं, शायद gilt feeling बहुत strong हो गयी है.
अब मैडम, आप तो इसे पढ़ोगी ही ना, तो आपसे हाथ जोड़ के गुजारिश है के ऐसे छुप छुप के तीर ना चलाइए, आइये आमने सामने खुले दिल से बात कर लीजिये, बातें साफ़ हो जाएँ तो दिल भी साफ़ हो जायेंगे.... और कहानी फिर से सुखद अंत ".... and they lived happily ever after." की तरफ बढ़ सकेगी.
बस अंत में एक बात और, आप ये सोचोगे कि फिर से title और ब्लॉग में कोई लिंक नहीं है... हाँ जी इस बार कोई लिंक नहीं है, बस इन्टरनेट कैफे आते वक़्त एक बिल्ली ने रास्ता काट लिया था तो मैंने उसे भी ब्लॉग में ले लिया. बस इतनी सी तो बात्तान्ना और sandy लिख गए पोथन्ना ! ;-)
एक रुबाई और... वही... मधुशाला से.. (बच्चन सर ने कुछ और सन्दर्भ में इसे लिखा होगा शायद, पर मैं अपने सन्दर्भों में कुछ अर्थ देखते हुए यहाँ ले रहा हूँ)
'मय' को करके शुद्ध दिया अब नाम गया उसको, 'हाला'
'मीना' को 'मधुपात्र' दिया 'सागर' को नाम गया 'प्याला',
क्यों न मौलवी चौंकें, बिचकें तिलक-त्रिपुंडी पंडित जी
'मय-महिफल' अब अपना ली है मैंने करके 'मधुशाला'।
'मीना' को 'मधुपात्र' दिया 'सागर' को नाम गया 'प्याला',
क्यों न मौलवी चौंकें, बिचकें तिलक-त्रिपुंडी पंडित जी
'मय-महिफल' अब अपना ली है मैंने करके 'मधुशाला'।
बातें, as usual, और भी हैं... वक़्त मिला, आलस्य से बच पाया और लिखने की हालत में रहा तो फिर लिखूंगा..! :-)
सलाम, शब्बा खैर, रब राखा ... शुभ रात्रि... bye!
No comments:
Post a Comment
Hi..!
Thanks a lot for taking out your valuable time for commenting on my post. Your inputs will help me in more than one way.
Regards,
Sandy